उत्पत्ति और इतिहास
रीस्लिंग की उत्पत्ति जर्मनी के राइन क्षेत्र में हुई, जहाँ पहला प्रलेखित उल्लेख 1435 में राइनगाउ के एक शराबखाने के बहीखाते में मिलता है। यह यूरोप की सबसे पुरानी सफेद किस्मों में से एक है। 18वीं और 19वीं शताब्दी में जर्मन रीस्लिंग विश्व की सबसे महँगी और प्रतिष्ठित वाइन मानी जाती थीं, फ्रांसीसी वाइन से भी ऊपर। 20वीं शताब्दी में सस्ती मीठी जर्मन वाइन की बाढ़ से इसकी प्रतिष्ठा को क्षति पहुँची, लेकिन हाल के दशकों में पुनर्जागरण हुआ है।
उगाने के क्षेत्र
जर्मनी का मोज़ेल क्षेत्र — अपनी खड़ी स्लेट ढलानों के साथ — विश्व के सबसे सुरुचिपूर्ण रीस्लिंग उत्पन्न करता है। राइनगाउ, फाल्ट्ज़ और नाहे भी प्रमुख क्षेत्र हैं। फ्रांस का अल्सास पूर्ण शरीर वाली, सूखी शैली प्रस्तुत करता है। ऑस्ट्रिया का वाखाउ और कैम्पटाल, ऑस्ट्रेलिया की क्लेयर और ईडन वैली, और न्यूयॉर्क का फिंगर लेक्स भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रदान करते हैं।
वाइन की विशेषताएँ
रीस्लिंग अत्यंत सुगंधित किस्म है जो सूखी से अत्यंत मीठी तक विस्तृत शैलियों में बनाई जाती है। सुगंध में हरा सेब, नींबू, आड़ू, खुबानी और नारंगी के फूल मिलते हैं, परिपक्वता के साथ विशिष्ट पेट्रोल/केरोसीन की सुगंध विकसित होती है। तालू पर कटी हुई अम्लता इसकी पहचान है, जो मिठास को संतुलित करती है। कम अल्कोहल (7-13%) और असाधारण दीर्घायु इसकी विशेषताएँ हैं।
भोजन के साथ जोड़ी
रीस्लिंग की बहुमुखी प्रतिभा इसे विश्व के सबसे भोजन-अनुकूल वाइन में से एक बनाती है। सूखी रीस्लिंग सुशी, थाई करी और वियतनामी व्यंजनों के साथ उत्कृष्ट है। अर्ध-मीठी शैलियाँ मसालेदार भारतीय और चीनी भोजन का आदर्श साथी हैं। मीठी रीस्लिंग फ्वा ग्रा और ब्लू चीज़ के साथ शानदार तालमेल बनाती है।
उल्लेखनीय वाइन
- Egon Müller Scharzhofberger (Mosel) — विश्व की सबसे प्रतिष्ठित रीस्लिंग
- Trimbach Clos Sainte Hune (Alsace) — अल्सास रीस्लिंग का शिखर
- Dönnhoff Oberhäuser Brücke (Nahe) — नाहे क्षेत्र की उत्कृष्ट अभिव्यक्ति
- Grosset Polish Hill (Clare Valley, Australia) — ऑस्ट्रेलियाई रीस्लिंग का मानक